* कृष्ण गीत *


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अब कै माधव मोहे उबारो 
पतितनि में विख्यात पतित मैं 
पावन नाम तिहारो....
अब कै माधव मोहे उबारो |
भटकी नैया, न मिले किनारा 
दासन को दे कौन सहारा 
विनती अब स्वीकारो....
अब कै माधव मोहे उबारो |

मोह जाल में मन भरमाया  
कंटक पथ, छाया अँधियारा 
दीनन को उद्धारो....
अब कै माधव मोहे उबारो |

झूठी माया मन बहकाए,
चंचल चित ये ठौर न पाए
मन से शूल निकारो....
अब कै माधव मोहे उबारो |

अंत समय जब सांस रुकेगी,
नजर तुम्हारी राह तकेगी,
संग न  कोई हमारो ....
अब कै माधव मोहे उबारो |
~राहुल 
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