* कृष्ण गीत *
------------ अब कै माधव मोहे उबारो पतितनि में विख्यात पतित मैं पावन नाम तिहारो.... अब कै माधव मोहे उबारो | भटकी नैया, न मिले किनारा दासन को दे कौन सहारा विनती अब स्वीकारो.... अब कै माधव मोहे उबारो | मोह जाल में मन भरमाया कंटक पथ, छाया अँधियारा दीनन को उद्धारो.... अब कै माधव मोहे उबारो | झूठी माया मन बहकाए, चंचल चित ये ठौर न पाए मन से शूल निकारो.... अब कै माधव मोहे उबारो | अंत समय जब सांस रुकेगी, नजर तुम्हारी राह तकेगी, संग न कोई हमारो .... अब कै माधव मोहे उबारो | ~राहुल --------------------------